फक माई ऐस…” कहकर किसी छिनाल की तरह चिल्ला रही थी। अब मुझे मजा आने लगा था।धीरेन्द्र अपने मोटे लंड से मेरी गांड मजे से चोद रहा था। उसने ५० मिनट इसी तरह मुझे कुतिया बनाकर मेरी गांड चोदी और अपना माल मेरी गांड में ही निकाल दिया। फिर हम दोनों एक दूसरे को बाहों में भरकर लेट गये। आधे घंटे बाद ही मेरे आशिक धीरेन्द्र का मेरी रसीली चूत पीने का दिल करने लगा।“बेबी…. XXX Hindi ओह्ह माय गॉड…यससससससस यस!!” मैंने उत्तेजना में चुदवाते चुदवाते हुए कहा। धीरेन्द्र बहुत जोर जोर से मुझे पेलने लगा। मेरा पूरा चेहरा तमतमा गया। मेरे जिस्म में गर्मी छिटक गयी। मेरे कान, नाक, आंख, स्तन, भगोष्ठ व योनि की आंतरिक दीवारें फुल गयी। मेरा भंगाकुर का मुंड नीचे की तरफ धस गया।मेरी धड़कने बढ़ गयी। मेरी चूत अच्छे से चुदने लगी। चूत की दिवाले योनी पथ पर अपना तरल पदार्थ चोदने लगी। इस चिकने मक्खन से मेरी चूत और भी जादा चिकनी और फिसलन भरी हो गयी। धीरेन्द्र का लौड़ा मेरी चूत के छेद में खटर खटर करके फिसलने लगा जैसे किसी कोयले की अँधेरी खदान में खुदाई का काम कर रहा हो। वो मुझे किसी रंडी की तरह चोदने लगे। उसने लगातार २ घंटे तक ठोंका और जमकर मेरी चूत मारी। दोस्तों मेरे पति ३ दिन बाद गाँव से लौटे तब तक मैं ८ बार धीरेन्द्र















