मैं उसके हटाने ही वाली थी कि मुझे लगा कि इसमे आनंद आ रहा है.मैं जान कर के चुपचाप लेटी रही. ये सुन कर मैं भी उसे अपनी तरफ़ खीचने लगी – “आँचल… मुझे पहले ऐसा किसी ने नहीं किया… अच्छा लग रहा है…”“हाँ… स्वर्ग जैसा आनंद आता है… पलक तू भी कुछ कर ना…”मैं भी उस से लिपट गयी. हिंदी XXX अब उसके हाथ मेरी चूत पर फिसलने लगे. अब उसके हाथ मेरी चूत पर फिसलने लगे. हम दोनों विजय को स्टेशन पर छोड़ कर ९ .३० तक घर लौट आयी. ये सोचते सोचते मैं जाने कब सो गयी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.आँचल बिस्तर पर लेट गयी और अपनी टांगें ऊपर कर ली. उसके होंट अब मेरे होंट से जुड़ गए. वहां हम सभी ने यानि आँचल, उसके पति विजय और मैंने सुबह का नाश्ता किया. फिर उसका हाथ मेरी चूत की तरफ़ बढने लगा.मैंने अपनी टांगे थोड़ी सी और चौड़ी कर दी. मैं बड़े शौक से ये सब सुनती रही और रोमांचित होती रही. मुझे नहीं पता… बस करती रह…”उसने मेरी गाण्ड से लण्ड निकाल लिया और मेरी चूत से उसे लगा दिया और बाहर से ही ऊपर नीचे घिसने लगी। मैंने आँचल का हाथ पकड़ कर डिल्डो को चूत में घुसा लिया और उछल पड़ी “हाय आँचल यह तो बहुत मोटा है…”“इसी से तो















