हमदोनो कुछ बोल नहीं रहे थे पर हो बहुत कुछ रहा था मेरा लण्ड एक बार फिर से तन चूका था, उसने खुद अपना पेटिकोट उतार दिया और जीवन के मैंने साक्षात ऐसा हाहाकारी नजारा आज इतने करीब से देखा इतना सुंदर इतना मोहक.उसकी टांगो के बीच जो जोड़ था वो पूरी तरह से गहरे घुंघराले बालो से ढका हुआ था अपने कांपते हाथो से मैंने उस द्वार को छुआ जहा से सब जन्म लेते है आज ज़िन्दगी का एक जरुरी पाठ पढ़ने को मैं अग्रसर था मेरी उंगलिया उसकी योनि प्रदेश पर किसी सांप की भांति रेंगने लगी.उसके पैर थरथराने लगे और जैसे ही मेरी उंगलियो ने योनि की दरार पर उन लाल लालिमा लिए फांको को छुआ, उंगलिया योनि के रस से भीगने लगी, कुछ नजाकत कुछ वक़्त का तकाजा एक बार फिर हमारे होंठ आपस में जुड़ गए. XXX Hindi अब नीलम ताऊ की जांघो पर आ गयी और लण्ड को अपनी चूत पे टिका के उसपे बैठने लगी.जैसे जैसे उसके चूतड़ नीचे आ रहे थे लण्ड चूत में गायब हो रहा था, और फिर मिश्री ने भी अपने लण्ड पर तेल चुपड़ा और उसे नीलम की गाँड़ पे सटा दिया और अगले पल जब मिश्री का लण्ड नीलम की गाँड़ में घुसा तो नीलम की आहे उस ख़ामोशी में गूंज उठी.जैसे डबल रोटी के दो टुकड़ों के बीच ढेर सारा















