लेकिन इस बार भी फायदा मुझे ही हुआ.. चुत पे.. हिंदी XXX चाची सुनो”.उसने अपनी आँखे ऊपर उठायी और मेरे आँखों में देखा.. आह.. हमारी नजरे मिली बस कुछ पलों के लिए और मैंने उसके आँखों में कुछ नहीं देखा.. मादरचोद.. उसके पीठ बिस्तर से टिके हुए थे और तभी मेरे लण्ड ने पिचकारी मार दी.. दोगला..”इसके बाद वो पलटी और कमरे से निकल गयी। मै स्तब्ध सा खड़ा रह गया.. अगर मैंने अपने हाथों को लण्ड से हटाया ना होता तो मैं झड़ चूका होता। अत्यधिक मादक दृश्य था वो।एक नयी शादी-शुदा जवान.. दबोच और खरोंच मारते जा रहा था।मेरा बायां हाथ चाची के कसे हुए चुंचियों को बारी-बारी से कभी पूरी हथेली में दबोच कर बेदर्दी से मसल रहा था तो कभी ब्लाउज के उपर उभड़े उसके सख्त निप्पल को चुटकी में ले के मसल रहा था। चाची बोहोत जोर-जोर से साँसे ले रही थी लेकिन वो अपने मुँह से एक शब्द भी बाहर नहीं निकलने दे रही थी।जब-जब मैं उसके जाँघों के चिकने गोश्त को मुट्ठी में पकड़ के मसलता था या उसकी सख्त चुँचियो को गूँथ देता था तो मुझे अपने लौड़े पे चाची के गोल-मटोल गाण्ड का दबाब बढ़ता हुआ महसूस होता था। मेरा बायां हाथ अभी उसकी चुंचियों के मर्दन में लगा था लेकिन मेरा दाहिना हाथ चाची के जांघो को भभोरते हुए उसकी चुत के ऊपर आ















