और क्या?भाभी: (वो लाल हो गई थी… क्योकि पहली बार आमने सामने बात हो रही थी) अरे बस बस… तो फिर मत करो न शादी भी? हिंदी XXX ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.मैं: क्या भाभी चलने मैं दिक्कत? भाभी की परोपकारी भावना ही यह कहानी का मुख्य कारण बना है… पुरष का बिस्तर, पुरुष की इच्छा अनुसार गरम करना औरत का सबसे बड़ा कर्तव्य होता है … ऐसी भाभी की सोच है…घर में ऐसे कपडे? पर मेरे पास आप के ब्रा पेंटी के अलावा कुछ था।नहीं तो मैं वहा अकेला अकेला थक गया…भाभी: वही तो… अब बताओ मेरा क्या हाल होता होगा?मैं: हा… वो तो है… वैसे वो लिंगरी ली कहा से थी?भाभी: अरे वो तो भैया ने ही दी थी…मैं: अच्छा… भाभी एक बात पुछु?भाभी: हा बोल….मैं: आप… सॉरी तू अपना बदन दिखाने के लिए और सेक्स दिखाने के लिए तैयार क्यों हो गई?भाभी: देख ये तेरे मेरे बीच की बात है… (वो सोच समजकर बोली) देख…. मैंने भी खूब दबोचा… पर भावनाओ में बहा नहीं… पर हाथ घूमते वख्त मैंने जो महसूस किया वो बताया…मैं: जैसे अभी नहीं पहना वैसे तभी भी मत पहनना…भाभी: धत् बदमाश… चल रात को मुझे देखने आ जाना… तेरा लाइव पोर्नो….हम दोनों हँस पड़े… भाभी को मेरे साथ कम्फर्ट महसूस होने लगा था… ये सब अब साबित हो रहा था… पर















