मैं होश में आने लगी परन्तु मेरे पूरे शरीर में मीठा-मीठा दर्द हो रहा था, मुझे ऐसा महसूस होने लगा जैसे मेरा पेशाब यहीं निकल जायेगा।मैं तुरन्त साहिल से खुद को छुड़ाकर कमरे से सटे टायलेट की तरफ दौड़ी। टायलेट की सीट पर बैठते ही बिना जोर लगाये मेरी योनि से श्वेत पदार्थ मिश्रित स्राव बड़ी मात्रा में निकलने लगा। परन्तु मूत्र विसर्जन के बाद मिलने वाली संतुष्टि भी कम सुखदायी नहीं थी। अपनी योनि को अच्छी तरह धोने के बाद मैं वापस अपने कमरे में आई तो देखा साहिल अपना नाईट सूट पहनकर टीवी देखने लगे। मैं भी अब पहले से बहुत अच्छा अनुभव कर रही थी, आते ही साहिल की बगल में लेटकर टीवी देखने लगी। पता ही नहीं लगा कि कब मुझे नींद आ गई।अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- मैं कुछ भी नहीं कर सकी, चुपचाप उनके बगल में जाकर सो गई। सुबह साहिल ने ही मुझे जगाया। मैंने घड़ी देखी तो अभी तो साढ़े पांच ही बजे थे, वो बहुत प्यार से मुझे जगा रहे थे.मैं भी उस समय फ्रैश मूड में थी, मुझे लगा कि शायद आज सुबह सुबह साहिल सुहागरात मनायेंगे मेरे साथ… जैसे ही मेरी आँख खुली, साहिल ने मेरी आँखों पर बड़े प्यार से चुम्बन लिया और बोले- कितनी सुन्दर हो तुम… मैं तो जैसे उनकी इस एक लाइन को सुनकर ही शर्म















