मुझे ये सब अच्छा नहीं लग रहा हैं.”वो मेरे करीब आ मेरे सीने पर साबुन लगाने का प्रयास करने लगा. अब मुझे साबुन लगाने दो.”मैं सोच में पड़ गयी, मेरे पीठ पीछे बासुकी क्या कर रहा हैं. XXX Hindi थोड़ी देर के लिए ही पहननी थी तो मैंने ब्रा भी नहीं पहना.अभी पूरा तैयार भी नहीं हुई थी कि डोर बेल बज उठी. पर बासुकी तो खुद उसके घर के उधर ही गया हुआ हैं.मैं सोचने लगी, दरवाजा खोलू या नहीं, कही वो मुझे रंग से ना भर दे, मेरी नयी साड़ी ख़राब हो जाएगी. उसने मुझे उठाया और बाथरूम के अंदर ले आया. वहा भी तो तुम लोग बिकिनी में रहते थे मेरे सामने. कमर वाले हाथ की उंगलियों से उसने डिबिया का ढक्कन खोला और अब उसी हाथ में डिबिया को पकड़ लिया.उसने थोड़ा रंग अपने एक हाथ पर लगा दिया और उंगलिया रगड़ कर कलर अपनी हथेली पर फैला दिया और मेरे दोनों गालो और ललाट पर लगा दिया. पेटीकोट के अंदर तो कुछ पहन रखा होगा न? आज मुँह मीठा कर होली मना लो, अगले साल रंग लगा देना. वैसे तो पेटीकोट गीला हो मेरे शरीर से चिपक गया था फिर भी मैंने एहतियात के तौर पर एक हाथ सीने से हटा अपना पेटीकोट पकड़ लिया.मैं: “बेशर्म, मेरे कपड़े क्यों खोल रहे हो.”विनय: “मैं तो तुम्हे सीधी कर रहा था















