उसके होंठ कितने मस्त थे कि उसे छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था। करीब 15 मिनट तक चूमा-चाटी के बाद मैंने शिखा को अपनी गोद में उठा लिया और अपने कमरे में ले गया। हमारा घर थोड़ा बड़ा है तो कमरे भी बड़े ही बनवाए गए हैं।मैंने शिखा को अपने बिस्तर पर बड़े प्यार से लिटाया और फिर मैं भी उसके बगल में लेट गया और उसके होंठों को चूमने लगा। अब अपने हाथों को उसकी ब्रा पर फेरने लगा। फिर धीरे से उसके कपड़ों को उतारने लगा। वो भी मेरा साथ दे रही थी।मैं उसके होंठों को.. हिंदी XXX मेरा नाम दिव्यांश सिंह है.. मैं तो बहुत दिनों से इसी रस की प्यासी थी।जैसे ही मेरा निकलने वाला था तो शिखा ने बाबूलाल को दांतों में दबा लिया… सच में दोस्तों मुझे इतना अच्छा लगा कि मैं देर तक अपने बाबूलाल को वैसे ही लगाए रहा और शिखा मेरे बाबूलाल का रस पीकर बहुत खुश थी। फिर शिखा ने बाबूलाल को साफ़ किया और मेरे गालों पर काट लिया।तब मेरी आँखें खुलीं और फिर अब प्यार का मेरा नंबर था। मैं भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता था। अब मैंने शिखा को बड़े ही प्यार से चूमते हुए चित्त लिटा दिया और उसकी गुलाबी पैन्टी को नीचे खींच कर उसके जिस्म से अलग कर दिया। हय..















