आरुशी से अब रहा नहीं गया. आखिर जब तीन उंगलियां चूत में आसानी से आने जाने लगी.तब मैंने उस से कान में कहा “आरुशी प्यारी ये आखरी घडी है अब भी मरजी न हो तो चली जा सकती हो.” जवाब में उस ने बुर पर लगा मेरा हाथ पकड़ कर दबा रखा और दांत से मेरा होठ काटा. XXX Hindi आयी.. मुस्कुराते हुए दांतों से होठ काटते हुए उस ने मेरे सामने देखा और हाथ बढ़ा के निक्कर के ऊपर से लौड़ा सहलाया. मैंने उस की कलाई पकड़ ली और कहा “जाती कहाँ हो, तेरे वादे का क्या हुआ.” वो घबराई सी बोली “मामू माफ़ कर दो मुझे. उस का बदन अकड़ गया मुझ से इतना जोर से लिपट गयी की मेरा चोदना रुक गया आँखें जोर से मूंद गयी मुंह से लार निकल पड़ी और सारा बदन पर रोएं खड़े हो गए और पसीना छूट गया.थोड़ी देर वो बेहोश हो गयी. पंद्रह बीस धक्के में मेरे बांध छूट गया और मैं जोर से झड़ा. पांच साल बीत गए. बगल में से दोनों हाथ डाल कर मैंने दोनों स्तन पकड़ लिए.आरुशी के स्तन छोटे थे लेकिन कठोर थे. आरुशी ने निक्कर पहन रखी थी. जीजू और दीदी ने आग्रह किया कि मैं उनके साथ रहूं. मुझे ऊपर मंजिल पर एक अलग कमरा भी दिया गया.सब खुश हुए लेकिन सब से ज्यादा आरुशी खुश हुई.















