अई…अई….अई……” विनीता चिल्लाने लगी क्यूंकि वो आधा ही बेहोश हुई थी।वैभव कई मिनटों तक अपने मोटे मुसल जैसे लौड़े से मेरी बहन के चूत के दाने को घिसता और छेड़ता रहा। फिर उसने एक जोर का धक्का दिया और उसका ८” लंड विनीता के भोसड़े में उतर गया और उसकी सील टूट गयी।“….उंह उंह उंह हूँ.. हमममम अहह्ह्ह्हह.. XXX Hindi हा हा हा..” विनीता आवाजे निकाल रही थी। वो सिर्फ आधी बेहोश हुई थी। वैभव को जोश चढ़ गया और वो और जोर जोर से विनीता की बुर पीने लगा। वैभव को तो आज स्वर्ग ही मिल गया था।कितने सालों से उसका बस एक ही ख्वाब था की एक दिन मेरी बहन की बुर जीभ लगाकर चुसे और आज उसका ये ख्वाब पूरा हो गया था। मेरा आमिर दोस्त किसी कुत्ते की तरह अपनी जीभ हिला हिलाकर विनीता की बुर चाट रहा था।उसके बाद वैभव ने अब विनीता के दोनों पैरों को खोल दिया और अपना ८” का मोटा लंड उसके चूत के दाने पर रखकर उपर नीचे करने लगा और जल्दी जल्दी घिसने लगा।“….उंह उंह उंह हूँ.. पीया जाए???” मैंने उससे पूछा.“यार माधव….दारु की तलब तो मुझे भी लगी है पर मेरे पास पैसे नही है!” वैभव बोला.“यार अपने बाप की जेब से छप्पन कर दो!!” मैंने कहा.“भाई माधव …मेरे बाप को शक हो गया है की मैं उसकी जेब से पैसे निकाल















