पर 10 दिन बीत गये, वो नहीं आयी।मैंने रोहित को उसे लाने के लिये भेजा, पर वो उसके साथ भी नहीं आयी और बहाना बना दिया कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है। इस तरह एक महीना बीत गया। इस बीच मैंने मेरे बेटे को 2-3 बार वंदना को बुलाने के लिये कहा लेकिन जैसे वो आना नहीं चाह रही थी।इधर मेरे दोस्त यार जो मेरे घर अक्सर आ जाया करते थे, बहू के बारे में पूछते थे. लेकिन उसके लिये मुश्किल यह थी कि वो लंड को चूत के अन्दर ले नहीं पा रही थी, वो लंड को पकड़ कर जब भी अन्दर डालने के जोर लगाती, लंड उसको चिढ़ाते हुए इधर-उधर फिसल जाता.वो बड़ी मासूमियत से मेरी तरफ देखने लगी. XXX Hindi लेकिन वो जितना मुझसे अपने को छुड़ाती, उतना ही मैं वंदना को जकड़ लेता।मेरी बहू कसमसाते हुए बोली- पापा जी, प्लीज अब छोड़ दीजिए ना!“क्या हुआ? और ऐसी बात वंदना से घर पर नहीं हो सकती थी।इसलिये मैंने वंदना से कहा- बेटा, तुम्हारे शहर आया हूं, मुझे अपना शहर नहीं घुमाओगी?वंदना खुशी-खुशी तैयार हो गयी। मैं वंदना के मम्मी पापा से इजाजत लेकर वंदना के साथ घूमने के बहाने घर आ गया। वंदना अपनी स्कूटी में मुझे बैठाकर मेरे साथ चल दी। थोड़ी देर तक मैं उसके साथ इधर-उधर की बातें करते हुए घूमता रहा।फिर मैंने वंदना को ऐसी जगह पर















