और मेरे पति पर काम का भार बहुत ज्यादा हैं इसलिए ऑफिस में बहुत समय देना पड़ता है और मैं घर में अकेली बोर होती रहती हूँ !और इस तरह हमारी दोस्ती बढ़ती चली गई और हम लोग रोज बहुत देर तक बात करते रहते! XXX Hindi बात उन दिनों की है जब मैं एक प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग जॉब करता था। मुझे अपने कस्टमर से उनके ऑफिस और शॉप पर जाकर मिलना पड़ता था और पूरे दिन फ़ील्ड का काम करना पड़ता था, लेकिन शनिवार को सिर्फ ऑफिस में बैठना पड़ता था और थोड़े बहुत काम फ़ोन से ही करने होते थे! क्योकि हमें यहाँ आये ज्यादा दिन नहीं हुए हैं इसलिए हमारी जान पहचान बहुत कम हैं. बातचीत का यह सिलसिला लगभग १ महीना चला ! बहुत देर रिंग बजती रही लेकिन किसी ने फ़ोन नहीं उठाया। मेरा मन मायूस हो गया, मैं क्या क्या सोच के आया था और अब उससे बात भी नहीं हो पा रही है!मैंने फिर से फ़ोन लगाया, अगर अब किसी ने फ़ोन नहीं उठाया तो मैं फिर कभी भी फ़ोन नहीं लगाऊंगा… … अभी दो ही रिंग गए थे कि किसी ने हेलो कहा और फ़ोन में वो ही खनकती हुई आवाज़ थी !मैंने पहचान लिया- हेलो मैडम मैं मनीष कपूर बोल रहा हूँ, हमारी पिछले हफ्ते आपस में बात हुई थी और मैंने आपको फ़ोन















