धीरे धीरे हम दोनों बड़े हो गये. हिंदी XXX कुछ देर बाद मीनू ने मेरी सलवार का नारा खिंच दिया. मीनू दांत से चबा चबाकर मेरे मम्मे पीने लगा. मेरे पैर खोल दिए. बाथरूम में मेरे उपर लेट गया. मैं भी चाहती थी की भाई मुझे चोदे. मुझे हल्का दर्द हुआ. ऐसी ही एक बात मैं अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी. मीनू ने अपना लम्बा सा लौड़े मेरे भोसड़े में डाल दिया. कितने दिन हो गये कोई चूत नही मारी! आना है तो आ जाना. उसने हाथ निकाल लिया. मीनू कुछ देर तक वो आँखें ही मलता रहा. हम दोनों बाथरूम में आकर नहाने लगे. बड़ी भागदौड़ की उसने. इससे तुम्हारा लौड़ा कमजोर हो जाएगा. “Didi Ka Doodh Piya”फिर वो मेरी चूत पर हाथ फिराने लगा. मेरी रसभरी बड़ी बड़ी छातियों को उसने मुँह में भर लिया. घन्टों मेरी चूत उसने अपनी उँगलियों से फेटी. मैं खुद को घर पर बोझ मानने लगी थी. मैंने कहा.मीनू आँख मींजकर उठा. पूरी रात उसने मुझे नंगा ही रखा और कुलमिलाकर ६ बार मुझे पेला खाया. तुम चाहो तो मेरी चूत मार लिया करो’ मैंने उससे कहा.पर दीदी?? हम दोनों खूब चुम्मा चाटी करते. चूत दो ना प्लीस. वो मेरी बड़ी शानदार ठुकाई कर रहा था. मेरे पैर खोल दिए. भाई उठो! मीनू ने अपनी ऊँगली निकाली और उसपर खूब सारा थूक दिया.















