घर का छटा देखने में ही बन रहा था कहा यहाँ की शांति और कहा मुंबई का भागदौड़ भरी ज़िंदगी. फिर रोशन गीता के मुह में अपना जीभ घुसा दिया चोद रहा था, गीता उसका मोटा लण्ड शायद बड़ी मुस्किल से ले पा रही थी, वो चिल्ला रही थी, अब बस करो, जल्दी गिराओ अपना माल. हिंदी XXX वो रात की अटखेलियां, हम दोनों एक दूसरे को खुसबू बाली तेल जो की अरब देश से मंगवाए है एक दूसरे का मालिश करते है, और जब वासना परवान चढ़ता है तो कामसूत्र के सारे कठिन से कठिन संभोग का तरीका आजमाता हु, दोनों की ज़िंदगी बहुत ही अच्छी चल रही थी.पर मैंने एकदम से एक बदलाब देखा गीता में, जब मैं इस बार गर्मियों में गाँव गया तो वह देखा. वो नागे बदन था और लंगोट पहना हुआ था, वो गीता को घूर रहा था. पर मैं कुछ भी नहीं कहा और सुबह सुबह ही मैंने गीता को चोद दिया और वो भी काफी मजा लिया सुबह की चुदाई का हो सकता है मन में रोशन को रख के मुझसे चुदवा रही थी.चोद कर मैं सो गया, करीब दो घंटे बाद नींद खुली तो गीता पास में नहीं थी, मैंने आवाज लगाईं पर वो कही नहीं दिखी, मैं भागकर छत पे गया और रोशन का कमरा झांक के देखा, रोशन भी नहीं था, तभी सामने ही जो















