‘ठीक है देवर जी !! देवर जी !! XXX Hindi मैं अच्छी तरह जानता हूँ की तेरी बुर में खाज है. फिर वो सौम्या की बुर पीने लगे.उनको ना जाने उसकी बुर पीने में कौन सा मजा मिल रहा था. ‘देवर जी !! मैं खिड़की के पास छिपकर सब देख रहा था. पति से चुदवा चुदवाकर तेरा दिल नही भरा तो रंडी देवर से लौड़ा खाने आ गयी !! क्यूंकि मैं एक १० १२ साल का अबोध बालक था. जीतेन्द्र अंकल ने मेरी माँ के दोनों टांग किसी छिनाल की तरह खोल दिए. मैं कुछ समझ नही पाया. मेरे जीतेन्द्र अंकल के कमरे की बत्ती जल रही थी.वो आई ऐ एस की तयारी करते है. जब मैंने अपने आस पास देखा तो मुझे माँ कहीं ही दिखाई दी. आज भी मेरी आँख १२, साढे १२ बजा के आसपास खुल गयी.मेरे बगल मेरी माँ जो हमेशा मेरे साथ सोती थी. उन्होंने सौम्या का दर्द नही देखा बस कमर हिला हिलकर उस बेचारी नादान लडकी को लेते रहे. कुछ देर बाद जीतेन्द्र अंकल सौम्या की लाल चूत में ही झड गये. अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- दोस्तों जब मैंने ये सब देखा तो मेरा लंड भी खड़ा हो गया. जीतेन्द्र अंकल मेरी माँ को किसी देसी छिनाल या रंडी की तरह चोद रहे थे.















