ऊओफ्फ्फ्फ़ की आवाज उसके मुँह से आने लगी थी। तभी उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और वो मुझसे बोली- ओह मेरी चूत तुम्हारे इस सुडौल लंड को लिए बिना नही रह सकती, प्लीज़ अपने इस खिलाड़ी को मेरी चूत के मैदान में उतार दो ताकि यह अपना चुदाई का खेल सके।कविता अब मेरे लंड को लेने के तड़पने लगी थी। मैंने भी उसी वक्त कविता को बाहों में भरा और उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया। कविता की चूत रसीली हो रखी थी, मैं कविता के ऊपर लेट गया, मेरा लंड कविता के चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था।कविता ने चूत को अपने दोनों हाथों से खोल दिया और मैंने धीरे से कविता की चूत में अपना लंबा लंड डालना शुरू कर दिया। काफी दिनों से कविता की चुदाई नहीं हुई थी इसलिए कविता की चूत एक दम टाईट थी। मैंने जोर से झटका लगाया और लंड पूरी तरह चूत की आगोश में समां चुका था।कविता के मुँह से आआह्ह मार डाला की आवाज़ निकल गई और मुझे थोड़ी देर हिलने से मना कर दिया। कुछ देर बाद वो नीचे से हल्के-हल्के झटके लगाने लगी। अब मुझे भी चूत का मजा आने लगा और मैंने कविता की चुदाई शुरू कर दी। जितने ज़ोर से मैं कविता की चुदाई करता, वो उतनी सेक्सी सेक्सी आवाज़ निकालने लगी- आह्ह….















