उसका पति बाहर और मेरी पत्नी बाहर, तो और क्या चाहिये था हम दो चुदाई के प्यासों को ! XXX Hindi मादरचोद इसकी बुर नहीं चूसेगा तो बदनसीब है!!! तुरंत ही मैं समझ गया कि यह उसका मूत्र है, तभी उसे स्वर्णारस कह रही थी, क्योंकि मूत्र स्वर्ण जैसे रंग का होता है ना। मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि जिसका कोई हिसाब नहीं। मैं खुद अचंभे में था कि मूत्र पी कर इतना आनन्द आ सकता है।क्या गज़ब का स्वाद था, मैं तो सारा जीवन मालिनी रानी का गुलाम बनने को उत्सुक था। मालिनी रानी ने अब तेज़ धार निकाली जिसे मैं खुशी खुशी पीता चला गया, एक बूंद भी मैंने नीचे नहीं गिरने दी। जब सारा का सारा स्वर्णामृत व़ह निकाल चुकी तो उसने मुझे उठ कर अपने से सट कर बैठने को कहा।मैं तो उसके स्वर्णामृत के नशे में चूर था, मज़े से भरा हुआ मैं तो पूरा मस्त था, मैंने यह स्वर्णामृत अभी तक अपनी पत्नी का क्यों नहीं चखा? क्या बदन था ! गुलाबी, रेशमी त्वचा, गहरे भूरे रंग के घनेरे बाल, निखरता गोरा रंग ! उसके लंड म़ें कांटे लगे हैं क्या?’ मैंने पूछा।‘बस मेरा जी नहीं मानता… वह इश्क़ लड़ाने के बाद अपना लंड साबुन से साफ करता है… जैसे किसी गंदी चीज़ से छू गया हो… कभी मेरी योनि नहीं चूसता… ऐसा दिखाता है कोई















