मैं पहली बार हिम्मत जुटा के आपको अपनी बात बताने जा रही हु, ज़िंदगी में कभी कभी कुछ चीज का ऐसा नशा हो जाता है जिसको छोड़ना बड़ा ही मुस्किल होता है, मेरे साथ भी वही हुआ था, मैं अपने पति को नापसंद करने लगी थी, और मेरा इंटरेस्ट दूसरे मर्दो में ज्यादा होता था, यहाँ तक की मुझे मेरे से काम उम्र के लड़को में ज्यादा रूचि होती थी. “Bhabhi Vasna Sukh”मेरे घर में कोई नहीं था, पति ड्यूटी गया था और बच्चे स्कूल, और नया मकान भी मेरा ऐसा था की मैं ही उसमे थी, तो कोई देखने बाला भी नहीं था, वो आके दरवाजा खटखाया मैं निकली, वो मुझे देख के बोला हाय क्या लग रही हो, ऐसा कहने का रीज़न भी था.क्यों की मैं ब्रा नहीं पहनी थी नाईट भी चिकना कपडा था वो की मेरे शरीर में चिपका हुआ था इस वजह से मेरे शरीर के सारे अंग साफ़ साफ़ दिख रहा था, चूच का निप्पल तक पता चल रहा था कपडे पर से. हिंदी XXX अब वो मेरे यहाँ रोज आ जाता था और चोद के मुझे जात्ता था, अब मुझे विवेक भी अच्छा नहीं लगने लगा, हद तो तब हो गयी जब मैं एक दिन कबाड़ी बाले से चुद गयी, उसके बाद फिर मैं अपने मकान मालिक से.फिर मैं अख़बार बाले से, मुझे अब हरेक दस दिन















