कामसूत्र: भारत का रसीला रहस्य

मुझे दुःख रहा है.. XXX Hindi अब डाल दीजिये…” और अपनी कमर उछाली। महक की उतावली देख कर धनेश एक जोर का शॉट दिया।“आमम्मा…. पूरा लेलो अपने मुहं में…” कहते धनेश जोर लगा कर अपना पूरा लवड़ा उस अनचुदी लड़की के मुहं में घुसेड़ेने लगा। एक दो बार तो लंड महक की गले में अटक गयी थी।“आआअह्ह्ह्हह…. तुम्हे शायद मालूम नहीं… यह रस पीनेसे और इसे अपने चेहरे पर लेपने से लड़की की सुन्दता बढ़ती है” धनेश महक की चूची लो टीपते बोला।महक इतना भोली थी की “क्या सच अंकल…” कह कर पूछी और फिर अपने शरीर पर गिरी उस लंड रस को निकाल निकाल कर चाटने लगी और अपने गालों पर लेपने लगी। जैसे जैसे वह चाटने लगी अब उसे चाट ने से स्वाद मिलने लगा। वह चटकारे लेकर चाटने लगी। फिर दोनों कुछ देर आराम करे।आधे घंटे की आराम के बाद धनेश ने महक से पुछा… “महक क्या अब गेम शुरू करे” धनेश का ऐसे पूछते ही महक चित लेट गयी और अपने टंगे पैलादी। अब वह भी उतावली थी। उसे उसकी सहेली पुष्पा की बातें याद आने लगी। “यार जब मर्द अपना लंड अंदर तक घुसाके मारते है तो वह आनंद अलग ही है। तू नहीं समझेगी यह बात। जब तू भी चुदवायेगी न तब समझ में आएगी।”महक को वह बात यद् आयी और वह बेसब्रेपन से अंकल की डंडे का

कामसूत्र: भारत का रसीला रहस्य

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