धीरे-धीरे मैं उसकी तरफ खिंचने लगी। पूजा भी मुझे उसका नाम ले कर छेड़ने लगी थी।लगभग दस-बारह दिनों में ही हम एक-दूसरे के करीब आ गए थे। एक दिन मैं और पूजा कैफ़े के केबिन में थे.. फिर पूजा बोली- तुम लोग बात करो.. हिंदी XXX मैं जाती हूँ। जैसे ही वो गई.. आज रात वो अपनी इच्छा पूरी करके ही रहेगा। मैंने कहा- नहीं यार.. सबने खाना खाया और उसके परिवार वाले पूजा के घर को जाने लगे। तो संजय बोला- मम्मी मैं नाजिया को लेकर आ जाऊँगा.. मतलब यह कि आज तेरा पूरा मन हो गया है कि आज तो अपना सब कुछ उसको देकर ही रहेगी..मैं बोली- यार बेचारे को बहुत तरसा दिया है.. डिनर पर.. उसकी मुराद पूरी.. पर आज बहुत दिनों के बाद मौका मिला है.. तभी पूजा का फ़ोन आ गया- हैलो.. फिर तो वो बहुत खुश हो गया और मेरी तारीफ़ करने लगा कि मेरा साइज़ बहुत मस्त है.. पर मैं नहीं मानी.. मेरे चूचे बहुत मस्त हैं। मेरा साईज उस समय 34-28-36 का था। उसने मुझसे कहा- तुम मुझे किस करो। मैंने मना कर दिया तो बोला- अरे फोन पर तो चुम्मा दे दो।मैंने उसको ‘पुच्च…’ की आवाज निकाल कर किस दे दिया..















