मेरा लंड एकदम तन गया।हम बातें कर रहे थे, तभी रजत ने कहा, “यार, मुझे भी घुड़सवारी सीखनी है। क्या तुम मुझे सिखाओगे?” मैंने कहा, “ठीक है।” फिर नेहा ने भी कहा, “मैं भी सीखूँगी।” बाद में हम फिर घोड़े पर बैठे और सीधे होटल चले गए। होटल पहुँचते ही मैंने नेहा को कमर से पकड़ा और उसे कूदने को कहा।तभी मैंने जानबूझकर अपना हाथ फिसला दिया और मेरा हाथ सरककर उसके दोनों स्तनों पर आ गया। उसके दोनों स्तन मेरे हाथों में आ गए। फिर मैंने गलती का दिखावा करते हुए सॉरी कहा, तो वो मुस्कुराने लगी। अगले दिन सुबह करीब 8 बजे मैं, रजत और नेहा दो घोड़ों पर एक खुले मैदान में पहुँच गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.वहाँ मैंने कहा, “नेहा भाभी, आप नीचे उतर जाएँ।” वो तो तैयार ही थी। फिर मैंने उसे नीचे उतारा और रजत को सिखाने लगा। नेहा एक ओर खड़ी थी। थोड़ी देर बाद नेहा ने कहा, “मुझे भी सिखाओ।” मैंने कहा, “ठीक है।” रजत ने कहा, “तुम भी घोड़े पर बैठो, कहीं नेहा गिर न जाए।”फिर मैंने नेहा को अपने आगे बिठाया। मेरा लंड उसकी गांड को छूते ही तन गया। अब मैंने घोड़े की लगाम नेहा के हाथ में दे दी और उसके हाथ पकड़कर सिखाने लगा। मैंने कहा, “अगर घोड़े को रोकना हो, तो लगाम को अपनी ओर खींचना चाहिए।” जैसे ही मैंने हाथ















