सो वो भी अब खामोश हो गया। रात काफी हो चुकी थी, अँधेरा पूरी तरह था हर चीज़ काली परछाई की तरह दिख रही थी। कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि अमृता मेरे बगल में आकर लेट गई है। गौर किया तो अनूप भी उसके बगल में लेटा हुआ था।मुझे लगा अब सब सोने जा रहे हैं सो मैं भी सोने का प्रयास करने लगी। तभी मुझे कुछ फुसफुसाने की आवाज सुनाई दी। उस फुसफुसाहट से मनीष भी करवट लेने लगा तो फुसफुसाहट बंद हो गई। कुछ देर के बाद मुझे फिर से फुसफुसाने की आवाज आई।यह आवाज अमृता की थी, वो कह रही थी- नहीं.. XXX Hindi कितना जोर से चोद रहे हो..!’इधर अनूप मुझे चोद रहा था और मुझे भी अब मजा आने लगा था, पर मेरी उत्तेजना अभी आधे रास्ते पर ही थी कि अनूप झटके देते हुए मेरे ऊपर गिर गया। उसने अपना लावा मेरी योनि में उगल दिया और शांत हो गया। मैं अब भी प्यासी थी, पर अमृता और मनीष अब भी चुदाई किए जा रहे थे और अमृता विनती पे विनती किए जा रही थी।सो मैंने मनीष से कहा- छोड़ दो मनीष वो मना कर रही है तो..!मनीष ने कहा- बस थोड़ी देर और..!मैंने तब मनीष से कहा- ठीक है मेरे ऊपर आ जाओ।उसने कहा- नहीं..












