क्या दोनों बहनों ने जगह बदल ली? हिंदी XXX काश यही मेरी बीवी बनती! मैं उलझन में दम साधे लेटा रहा। “जीजाजी…” मगर इस बार मेरे कानों ने झूठ पकड़ लिया। कुसुम मेरी परीक्षा ले रही थी। मुझे गुस्सा आया कैसे मुझे उस आवाज के बारे में गलतफहमी हो गई। लेकिन फिर भी मैं उस संभावना के आतंक में चुपचाप पड़ा रह गया।हलकी हँसी की आवाज आई और एक हाथ ने मुझे घेर लिया। “जानेमन…” मैंने स्वयं में लिपटते पत्नी के हाथ को खींचा और उसकी शरारत का भरपूर जवाब देते हुए उसे जोर से अपने में भींच लिया। मेरी बाँहों के कसाव से उसकी कुछ क्षण साँस रुक गई। मैंने जकड़ ढीली की। उसने मुझे चूम लिया। एक आवाज रहित चुम्बन। बल्कि चुम्बन कम, होठों का रगड़ना, चूसना अधिक।मेरी बाँहों में दबे मांसल, नर्म, धड़कते नारी शरीर के बगल में वैसी ही पतली नाइटी के पीछे एक युवा मांसल, सुंदर, जीवंत नारी शरीर था … किंतु पहुँच से दूर… छाया मात्र। मैं उस छाया को छू लेने के लिए लालायित था। लेकिन बीच में थीं सभ्यता, समाज, संस्कारों की अनुल्लंघनीय दीवारें।मुझे डर लग रहा था, कहीं रश्मि को हमारी हरकतों का पता न चल जाए। अगर पता चल रहा होगा तो वह कितना लज्जित हो रही होगी। मैंने पत्नी के कान में फुसफुसाकर अपना डर जाहिर किया तो उसने आलिंगन की पकड़ और










