गर्म देसी माँ का बदन

मैं बिलकुल बेकाबू हो गयी थी. XXX Hindi रणविजय गहरे और गहरे धक्के मेरी चूत में देने लगा. रोज उसका मेकअप करती, उबटन लगाती जिससे मेरी बेस्ट फ्रेंड शादी के दिन बिलकुल परी लगे. मेरे रूप और निखार को वो किसी मधुमक्खी की तरह चूस रहा था और पी रहा था. मुझे यकीन नही हो रहा था की जिस रणविजय में मैं इतना प्यार करती हूँ वो मुझे मुझसे अंदर ही अंदर से प्यार करता होगा.हम दोनों बड़ी देर तक लिप लोक किस करते रहे. मेरी चूत अब भी रणविजय के माल की प्यासी थी. प्लीस नराज मत होना!!’ मैं सोरी की मुद्रा में कहने लगी.वो अचानक से बहुत जोर जोर से हंसने लगा. मेरी जान मीरा !! मैं हाथ से उसके मोटे ८ इंच के लंड को आगे पीछे करके फेटने लगी और मुँह में लेकर चूसने लगी.इससे रणविजय को बहुत चुदास चढ़ गयी. आज भी मेरा उससे इश्क जारी है.अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- मेरे आशिक चोद लो मुझे!!…आज मेरे साथ अपना बिस्तर गर्म कर लो!! मैं जहाँ से मूतती थी रणविजय उस छेद को भी किसी लोमड़ी की तरह चाटने लगा.मैं मीठी मीठी सिस्कारियां भरने लगी. उसने पुरे १ घंटे तक मुझे चोदा फिर वो झडा था. मैंने उसकी गोद में चली गयी और झुककर उसके सुंदर लंड को पीने लगी. रणविजय, मेरा आशिक मुझे चोदने लगा.

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