हराम जादी, उस बच्ची को भी नहीं छोड़ेगी। श्रृष्टि के चेहरे को पकड़ कर उसको इशारा से मुँह खोलने को कहा।श्रृष्टि भी यह सब देख कर गरम थी सो मुँह खोल दी और मिथिला उसके होठ से होठ सटा कर उसके मुँह में मेरा सफ़ेदा गिरा दी और फ़िर श्रृष्टि को बोली, “निगल जाओ इस चीज को।” श्रृष्टि बिना कुछ समझे उसे निगल गई। सुधा सब देखी और बोली, “छीः…” हम सब हँसने लगे।मिथिला बोली, “तुम तो सुधा मेरा गाँड़ मराई देखने का कीमत अपना बूर चुदा कर चुकाई, और क्या श्रृष्टि फ़ोकट में मेरा गाँड़ मराई देखती… उसको भी तो इसका कीमत चुकाना चाहिए… तो वह इसका कीमत लन्ड का माल खा कर चुकाई।” श्रृष्टि सिटपिटा कर चुप ही रही… पर मैं हँस पड़ा।मेरा लन्ड अब शायद वियाग्रा के असर में था, टन्टनाया हुआ… और तैयार। मेरे लन्ड को हल्के से एक चपत लगाई मिथिला और मैं आह्ह… कर बैठा तो वो बोली, “मेरी गाँड़ फ़ाड़ोगे और मेरा एक थप्पड़ नहीं खाओगे… ऐसा कैसे होगा।”इसके बाद को थोड़ा और जोर से जल्दी-जल्दी ५ थप्पड़ मिथिला ने मेरे फ़नफ़नाए हुए लन्ड को लगा दिए और मैं अब दर्द महसूस करके चिहुँक कर पीछे हटा। मिथिला मुझे परेशानी में देख कर खिल्खिलाई और बोली, “आ जाओ अब… फ़ाड़ो मेरी गांड़”।मुझे गुस्सा आया और फ़िर अपने गुस्से पर काबू करते हुए मैने मिथिला को










