दिव्या की जीन्स के उपर से और दामिनी की पॅंटी के उपर से. एक बार मेरे काफ़ी ज़िद करने पर वो तय्यार हो गयी. XXX Hindi और वो दामिनी की ड्रेस से भी छोटी थी. इतने में शालिनी ने अपनी एक उंगली दिव्या की चूत में डाल अंदर बाहर करने लगी. रात के 12.00 बज चुके थे और दूसरे दिन काम पर भी जाना था. दिव्या जैसे ही किसी काम से नीचे को झुकती तो उसकी गांद थोड़ा सा उपर को उठ जाती. मुझे आज पहली बार एहसास हुआ की गांड मारने मे कितना मज़ा आता है. इतने में शालिनी का शरीर आकड़ा और जैसे कोई नदी का बाँध खोल दिया गया हो उस तरह से उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. में शालिनी के पास आ गया जो राकेश और दामिनी के साथ बातें कर रही थी. शशांक ने उसकी टाँगो को उपर उठा कर कुर्सी के हथे पे रख दिया. बॅटरी पे चलता रिमोट उसकी चूत में आग लगाए हुए था. में सोच रहा था कि पता नही अब आगे क्या होने वाला है? दिव्या के झुकते ही उसकी गोरे चुतताड उप्पेर उठ गये थे और उसकी गुलाबी चूत साफ दिखाई दे रही थी. शालिनी ने आपने आप को मुझे सोन्प दिया था. मेने अपने दोनो हाथों से उसकी चुचियाँ पकड़ कर उसे अपने नज़दीक खींच लिया, और उसके कान में फुसफुसाया,















