इसलिए मैंने भी माधुरी की इस हरकत को रोका नहीं. हिंदी XXX मैंने माधुरी से ये पूछ ही लिया.माधुरी ने जवाब दिया “भाभी इसमें कुछ भी गलत नहीं है. मैंने अशोक के होंठों को अपने होंठों से उसी तरह से शुरू किया और थोड़ी देर के बाद मेरे और अशोक के होंठों आपस में मिल चुके थे और हम दोनों रुक रूककर एक दुसरे के होंठों का रस पी रहे थे.अशोक जबर्दस्त नशे में आ गए और करीब दो घंटों तक मुझे नहीं छोड़ा. उन्होंने मुझे इतना चूमा कि मेरी सांस फूल गई. आप जितना होंठों से होंठों को चुमोगी ना उतना ही आपको उत्तेजना आएगी और आपको ऐसा लगेगा कि आपके बीतर कोई तरंग उठ रही है और आपके नीचले हिस्से में जल्दी ही कुछ बहने लगेगा.”मैं माधुरी की बातें सुनकर मन ही मन रात के लिए योजना बनाने लगी. माधुरी अब मेरे बिन नहीं रह पाती थी. माधुरी ने मेरे हाथ पकड़ लिए. मैंने जब खुद को आईने में देखा तो हैरान रह गई. अशोक माधुरी की मर्द्वाली प्यास बुझा रहा था. मगर माधुरी ने मेरा साहस बढाए रखा. माधुरी ने उस अंगूर को मेरे मुंह में धकेल दिया. आओ हम शुरुवात करते हैं.”माधुरी ने मुझे अपनी बाहों में भरा और बोली “आप ये समझो कि मैं आपके वो हूँ और हम सेक्स की शुरुवात कर रहे हैं.















