मैं हैरान थी। उसने पल में उसकी लुंगी एक तरफ़ कर उसका लौड़ा मुँह में ले लिया। बंदा आंखें बंद कर चुसवा रहा था।मैंने एक छोटा पत्थर उठा कर वहीं पड़े सूखे पत्तों पर फेंका। दोनों एक दम सीधे हो गए। मैंने एक पत्थर और फेंका तो वो लड़का भाग़ गया। लेकिन बंदा वहीं था उसको क्या फर्क पड़ता ! उसका था कि बहुत मुश्किल से झड़ा। उसने तो मेरी चूत फाड़ दी। जब मैं कपड़े पहन रही थी तो वो लेटा हुआ अपनी मर्दानगी पर मूछें खड़ी कर मुझे घूर रहा था।तभी उसके दो साथी मजदूर भी अपने अपने काम से वापिस आ गए। तब तक मैंने सिर्फ टॉप पहना था, पेंटी डाली थी। दोनों मेरे करीब आये और फिर अपने दोस्त को देखा। उसने न जाने क्या इशारा किया कि दोनों मेरे जिस्म के करीब आकर एक मेरी जांघ और दूसरा मेरे मम्मे सहलाने लगा। लेकिन मुझे जल्दी थी मैंने उन्हें अगले दिन आने का वादा किया। आते आते मुझ से रुका नहीं गया और दोनों के पास गई और उनकी लुंगी उठा कर उनके लौड़े देखे- क्या लौड़े थे ! हिंदी XXX अब तक का मेरा सबसे मोटा लौड़ा था !ऐसी चीज़ों को जाया नहीं करते राजा ! उसका था कि बहुत मुश्किल से झड़ा। उसने तो मेरी चूत फाड़ दी। जब मैं कपड़े पहन रही थी तो वो लेटा हुआ















