गर्म भारतीय चुदाई

कितना अच्छा है.. अंदर आईये..” कहते उसे अंदर बुलाया। दोनों अंदर आकर बैठे। टू सीटर सोफे पर आने वाला बैठा तो उसके दायां तरफ के सिंगल सीट सोफ़े पर धनेश बैठा था।“बोलिये जिंदल साब कैसे आना हुआ….?” धनेश ने उसे देखते पुछा। उनकी बातें अंदर से महक सुन रही थी।“वही धनेश जी.. हिंदी XXX फिर भी… आखिर मैं क्या करती। मैं इक्कीस की होगयी हूँ, मेरा बेवड़ा बाप तो मेरी शादी नहीं करेगा। बॉय फ्रेंड की तलाश नहीं कर सकती। वैसे मुझ जैसे सामान्य लड़की को कौन अपना गर्ल फ्रेंड बनाएगा? एक गिलास पानी चाहिए थी”। महक अपनी गिलास टेबल पर रखी और पानी लाने किचेन की ओर गयी। जिंदल ने जल्दी से अपने गिलास का व्हिस्की महक के गिलास में उंडेला और फिर अपने गिलास में व्हिसकी डालने लगा। तब तक महक पानी ले आयी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.अपने गिलास की व्हिस्की में पानी मिलाकर एक सिप करा और चटकार लेते बोला .. मममम करो अंकल.. वह आनंद मैं चाहती हूँ.. ओफ्फोऊ… मैं मरी…. “अंकल हाथ निकालिये…” वह धीरे से बोली।“क्यों क्या हुआ डियर…?” वह काम जारी रखते पुछा…“मुझे अच्छा नहीं लग रहा है…” बोली।जिंदल कुछ देर ख़ामोशी से रहा और फिर से बोला … “लगता है तुम्हारे मामाजी तो अभी नहीं आएंगे, मैं चलता हूँ…”“नहीं अंकल रुकिए तो..

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