मै तो हर दिन ऐसी ही लगती हूँ। तभी तुम दोनों मेरे को देखकर हमेशा लार टपकाते रहते हो!संजय: सिर्फ लार टपकाने से क्या होता है। लेने को मिला ही नहीं.मैं: तुम लोगो ने आज तक मेरे को देखकर लार टपकाया है। आज मैं तुम्हे अपने बदन को चाटने का मौका दूँगी.मोनू: भाभी आप हमसे चुदवायेंगी??मै: हाँ मोनू तुम्हारे भैया भी तो बाहर किसी की चूत पी रहे होंगे.मैने दोनों को अपने पास कर लिया। वो दोनों मेरे को ताड़ने लगे। मैंने अपने हाथों से साडी को पेट से हटाया। मेरे गोरे पेट पर गहरी चूत सी नाभि को देखते ही दोनो झपट पड़े। मोनू मेरी नाभि को चाट रहा था। मैं चुपचाप अपनी नाभि को पीने दे रही थी। उसने अपनी जीभ मेरी नाभि में घुसाकर मेरी सिसकारी निकलवा दी।मैं “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. XXX Hindi हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्ह ह..अ ई…अई…अई…..” की आवाज के साथ कमर को मटकाते हुए चुदवा रही थी।मोनू ने सिर्फ मेरी चूत को भरता बनाया था। लेकिंन संजय के लंड ने तो उसकी चटनी निकलवाने पर तुला था। वो तेजी से अपने लंड को मेरी चूत में कमर उछाल उछाल कर चुदाई कर रहा था। मैं भी उसका साथ दे रही थी। मेरे को बहोत ही आनंद आ रहा था। मोनू का लंड एक बार फिर से तैयार हो गया। संजय ने















