एक बार मैंने मक्खन के कटोरे में यूं ही फ़न के लिए अपना लंड घुसाया था. मेरा लंड उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा. XXX Hindi इतने में दरवाज़े पर नज़र गई तो आंखे चौंधिया गईं. फचाक फचाक की आवाज़ आने लगी. वही करो.वो हंसने लगी और बोली… हाथ से या मुंह से. मालिश.गरम या ठंडा?दोनों ही कर दो…. उसकी आंखें बंद थी. इतनी मंहगी चाय !” चाय तो मुफ्त में मिलेगी साब…. पेंट के साथ अंडर वेयर भी उतरने लगी. मैं इसी इंतज़ार में था. उसने फिर मेरी गांड में अपनी उंगली डाल दी. फिर बिजली बोली…. मैंने उसकी गांड के दोनों भागों पर अपना हाथ फेरा. और फिर…. सौ रुपये कल रात की मालिश के.”और दूसरे सौ रुपये ?’ * आज नहीं कराएंगे क्या मालिश ?” मेरे बदन में झुरझुरी सी आ गई. वो मेरे शक को भांपते हुए बोली…. मैं आगे होने वाली घटना को याद करके थरथराने लगा.कपड़े उतार दो साब, वो बोली….मेरा हलक सूखने लगा. वो बाथ रूम में पानी का घड़ा रखने चली गई और मैं सोचने लगा, ऐसे पिछड़े गांव में भी हुस्न है !पानी रख कर वो सर झुकाए मेरे सामने से चली गई और मैं उसकी मस्त चाल और कमर के नीचे के भाग को मतवाले अंदाज़ में हिलता देखता रह गया.















