पापा मेरे झुल्फो को जो मेरी गालों को छू रही थी हमें नफरत बोले जान क्या कयामत लग रही हो मैं मुस्कुराता हूं उनकी आंखें देखने लगी और मैं कुछ और कहती तभी पापा ने अपने होठ मेरे होठों पर रख दिये दिए और मेरे होठों को चूमने लगे.और कहने लगे क्या हुआ जानू अपनी डार्लिंग को डार्लिंग ना कहू तो क्या कहू। पापा के इस रोमांटिक अंदाज से मन ही मन बड़ी खुश थी फिर भी थोड़ा सा मुंह बना कर बोली क्या बच्चों के सामने मुझे ऐसे बोलना अच्छा लगता है तो पापा का हाथ जो मेरे दो पर था उससे मेरे दो पर दबते हुए बोले तो फिर तुम भी बताओ मेरी रानी उनके सामने क्या कहूं जो तुम्हें अच्छा लगता है मुझे तो अपनी जान हो ऐसे ही बोलना अच्छा लगता है.मुझे लगा कि पापा से अब आगे बढ़कर करना अच्छा नहीं लगेगा क्योंकि मैं जानती थी कि वो मानने नहीं वाले थे तो मैं भी मुस्कुराती हूं कहो आप मानोगे नहीं जो मर्जी कहे आप की मर्जी पर पहले जल्दी से बच्चों को स्कूल छोड़ आए ताकि उनको देर न हो जाए और मुस्कुराती खिलखिलाते उनकी बाहों से निकल कर बाहर को आ गई.पापा भी कुछ ही हूं, मैं तैयार हो कर मेरे पीछे-पीछे आ गई और दोनों बेटियों को ले कर स्कूल जाने लगे तो छोटी















