मर गयी……मैं तो आजजजजज!!” मैं तेज तेज किसी चुदासी कुतिया की तरह चिल्लाने लगी।जीजा अपनी धुन के पक्के थे। वो मुझे पक पक करके ठोंक रहे थे। मैंने जीजा को अपना तन, मन, धन सब कुछ समर्पित कर दिया था। वो मुझे किसी रंडी, अल्टर, लंड की प्यासी औरत की तरह जल्दी जल्दी चोद रहे थे। मैं आँख बंद करके चुदवा रही थी, पर आँखों में एक अजीब सी जलन दोनों आँखों में मैं महसूस कर रही थी।“ले रंडी ले….आज खा ले अपने जीजा का लम्बा लंड!!” जीजा ने मुझे गाली दी.मुझे बहुत अच्छा लग। क्यूंकि गालियाँ खाकर चुदवाने में एक स्लट [बाजारू वेश्या] वाली फिलिंग आ जाती है। इसी बीच जीजा ने मेरे गाल पर ताड ताड़ ४ ५ थप्पड़ जोर जोर से मार दिए। मेरा मुंह लाल हो गया। इससे मेरी कामइक्षा और चुदास और जादा बढ़ गयी।जीजा फिर से मेरे रसीले होठ पीते पीते मुझे पेलने लगे। इस बीच मैं ३ बार झड़ चुकी थी। कुछ देर बाद जीजा आउट हो गये। उन्होंने अपना सारा माल मेरी चूत में ही छोड़ दिया। कुछ देर तक सुस्ताने के बाद उन्होंने मुझे बेड के किनारे कुतिया बना दिया।मैं सर और कंधे के बल लेट गयी और मैंने अपनी गांड उपर उठा दी। एक बार फिर से जीजा मेरी चूत को पीछे से आकर पीने लगे। इस बार उन्होंने टूथब्रश में थोडा















