20 मिनट के बाद गाड़ी एक ऊंची सी बिल्डिंग के आगे आकर रुकी।ड्राईवर बोला- मैडम यहीं उतरना है आपको।मैं उतर गयी और ड्राईवर चला गया। तभी मेरा फोन बजा, मैंने उठाया तो उधर से एक लड़का बोला- मैंने गेट पे बोल दिया है, तुम सीधा अंदर आ जाओ फ्लैट नंबर 804 में। मैं लिफ्ट लेके आठवें फ्लोर पे पहुंची और फ्लैट की बैल बजाई।जैसे ही गेट खुला मैं एकदम से चौंक गयी। इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, उसने मेरा हाथ पकड़ के अंदर खीच लिया और दरवाजा बंद कर दिया। कमरे में मेरे कॉलेज का एक सीनियर लड़का था जिसका नाम निमेश था। वो दिखने में तो कुछ खास नहीं था पर काफी लंबा तगड़ा था।मैं चौंककर बोली- सर आप?वो बोला- हाँ मैं… आओ और सोफ़े पे बैठ जाओ।मुझे उत्सुकता से ज्यादा अब डर सा लग रहा था।वो समझ गया था कि मैं डर रही हूँ। उसने बोला- डरो मत, आराम से बैठो।मैं बेचैनी से बैठ गयी।वो बड़े सलीके से पेश आ रहा था। निमेश बोला- डरो मत, कुछ नहीं होगा। कुछ पियोगी?मैं बोली- एक ग्लास पानी दे दो।उसने पानी दे दिया।फिर उसने अर्चना को फोन मिलाया और कहने लगा- मानसी आ गयी है फ्लैट पे… पर डर रही है, जरा समझा दो इसे।निमेश ने फोन मुझे दे दिया। मैं बाल्कनी में जा के बात करने लगी।अर्चना ने बोला- डर















