मैं बाहर दूकान पर कपड़े इस्त्री करवाने जा जाता हूँ” देव बोले.“अरे बेटा! हिंदी XXX रोज मेरे छोटे भाई से चुदती हो, आज मुझसे चुद जाओ। आज तुम्हारे रूप की आग में खेलना चाहता हूँ” देव बोले मेरे दूध पर हाथ घुमाने लगे.“जल जाओगे जेठ जी!!” मैं घमंड करके बोली.“तो आज मुझे अपने यौवन की आग में जला कर मार डालो तुम” वो बोले और मेरे हाथो से प्रेस को छुड़वा दिया और मुझे अपनी बाहों में भर लिया। मैं किसी फूल की कली की तरह “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा सी सी सी” करने लगी। मेरे जेठ मुझे हर जगह हाथ लगाने लगे।फ्रेंड्स आज भी मैंने पिंक कलर की मैक्सी में थी। धीरे धीरे उनकी पकड़ मेरी कमर पर सख्त हो गयी और फिर वो मुझे सीधा अपने बिस्तर पर ले गये और लिटा दिया। मेरे होठ बहुत ही रसीले और खूबसूरत थे। देव पहले तो कुछ देर मेरी सुन्दरता और यौवन को ध्यानपूर्वक देखते रहे, फिर एकाएक मेरे लबो पर लब रखकर चूसने लगे।मैं कसमसाने लगी। वो मजे लेने लगे और मेरे ओंठ को मुंह चला चलाकर अपने मुंह में लेकर चूस रहे थे। मैं “……अई…अई….अई…..इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” करने लगी। फिर मुझे भी उनका साथ देना ही पड़ा। मैं भी चूसने लगी।मेरे जेठ देव बदन और शरीर में मेरे पति से 21 थे। इसलिए उनका बदन कुछ जादा ही बलिष्ठ था। मैं भी मन ही















