शीतल तड़पने लगी. उसे भी लंड की दरकार थी.पाण्डेय जी मस्ती से शीतल के दूध पीने लगे. हिंदी XXX कुछ नही होगा कोई नही आएगा. कुछ मिनट की मसक्कत के बाद उन्होंने शीतल के बेहद कसे ब्लौस की बटन खोल लिए. अपना निकर निकाल दिया.उनका लंड आज भी अच्छा ख़ासा मोटा और लम्बा था. ये आप क्या कर रहें हो?? तुमको कपड़े, गहने सब दूँगा, पर तुम मेरे प्यार को मत ठुकराना! बड़ी देर तक कुछ नही हुआ.पर जल्द ही शीतल का बदन ऐठने लगा. वो सबसे चहेते थे. कुछ देर बाद उन्होंने शीतल को फिर चोदा. अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- आप तो ब्राह्मण है? वैसे तो पाण्डेय जी को स्कूल में कोई खास दिक्कत नही होती थी, पर एक गम था उनका स्कूल जरा देहात में था. पर शीतल भले ही ब्राह्मण नही थी एक हरिजन थी, इसके बावजूद पाण्डेय जी उससे प्यार कर बैठे.वो सुबह जब तक शीतल को देख नही लेते, उनको चैन नही पड़ता. वहां बच्चे ना के बराबर थे. उसकी छातियाँ जो बड़ी बड़ी गोल गोल रसीली थी कबसे इतंजार कर रही थी की कोई मर्द उसकी छातियों को पिए.पर आज ये शीतल का सपना पूरा हो गया था. वो सारा दिन बस अखबार पढ़ा करते थे.क्यूंकि पुरानी सोच होने के कारण वो ना तो फसबुक करते थे, और ना ही वाट्सअप.















