मैं जबरन उसके होंठो की गिरफ़्त से आज़ाद हो कर बोली, “छ्चोड़ो, मुझे साँस लेने में तक़लीफ़ हो रही है.” उसने मुझे छ्चोड़ तो दिया मगर मेरी चूची पर अपना एक हाथ रख दिया.मैं समझ रही थी की आज इसका मन पूरी तरह रोमॅंटिक हो चुक्का है. वैसे तुम ईमानदारी से बताओ कि तुम्हे मज़ा आया या नहीं?” उसकी बात सुनकर मैं चुप हो गयी और चुपचाप अपने कपड़े पहनती रही. XXX Hindi उसकी इन्ही सब बातो के कारण मैं उसे पसंद करती थी और एक प्रकार से मैने अपना तन मन उसके नाम कर दिया था.एक दिन मैं उसके साथ कार में थी. एकदम जानलेवा धक्का था, भकक से चूत के अंदर लंड का सुपाड़ा समा गया, इसके साथ ही मेरे मूह से चीख भी निकल गयी.चूत की ओर देखा तो पाया कि बीच से फट गयी थी और खून निकल रहा था. वो आराम से मेरे कपड़े उतारने लगा, पहले उसका हाथ मेरी चूची पर ही था सो वो मेरी चूची को ही नंगा करने लगा.मैं होल से बोली, “मेरा विचार है कि तुम्हे अपनी भावनाओं पर काबू करना चाहिए. जिसके बारे में मैने पहले कभी सोचा तक नहीं था. उसके सुपादे को होंठो के बीच दबाए उस पर जीभ फेरती रही. मैने कहा, “मगर फिर भी तो तुमने फाड़ कर लंड घुसा ही दिया.”“अगर नहीं घुसाता तो मेरे ख़याल से तुम्हारे










