ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.मेरे अंदर भयानक आग लगी हुई थी मैं अपनी चूत में उंगली डालें सिर्फ को उधर झटका करेगी थी मैं उंगली डालकर उसका पानी निकलने लगी एक हाथ से अपने चूत को और दूसरे हाथ से अपने चूचियों को सहलाने लगी फिर निपल को धीरे धीरे मसलने लगी मेरे मुँह से आआआआआआह्हह्हह्हह्हह्ह रिंकी के पापा करो नहीं तो मर जाऊंगी मैं आआआआ.जैसे ही निकलने लगी आज मेरे पापा के हथियार के बारे में मैं सोच कर पहली बार अपनी चूत मैं उंगली कर रही थी। मेरे लाख चाहने पर भी अपनी चूत की आग को ठंडा नहीं कर पा रही थी बाल्की मैं तो आग में घी डाल राही थी. XXX Hindi मेरी उंगली वो काम कैसे कर सकती थी जो काम पापा का लंड कर सकता था.पर जो भी था अब मुझे ये दो दिन तो किस भी तरह कटाने ही थे कैसे भी करके अपनी चूत की आग को अपनी उंगली से ही ठंडा करने की कोशिश करनी थी तो मैंने किया पता नहीं कब मुझे नींद आई पता ही नहीं चला। हमारी शादी की तयारी जौरो से चल रही थी बस मुझे एक ही बात का दुख था कि बुआ हमारी शादी मेरे साथ ज्यादा दिन तक रुक नहीं रही थी.मेरे दिमाग में आया क्यू ना पापा से काहू वो शायद















