गाड़ी में देसी गर्लफ्रेंड का मुंह भरा हुआ

तभी दरवाजे पर आहट हुई, इस समय कौन आया होगा, यह सोचते हुए सुनीता दरवाजे की तरफ बढ़ी। दरवाजा खोलते ही उसकी धड़कनें बढ़ गई। दरवाजे पर विवेक खड़ा था।“इतनी जल्दी कैसे आ गया तू…”“कुछ नहीं बस थोड़ा सिर में दर्द था तो वापिस आ गया!” कहकर विवेक अपने कमरे में चला गया।कुछ देर बाद सुनीता विवेक के कमरे में चाय पूछने के लिए गई तो विवेक उसी समय बाथरूम से फ्रेश होकर निकला था और उसने उस समय बनियान और अंडरवियर ही पहना हुआ था। ना चाहते हुए भी सुनीता की नजर उसके अंडरवियर में लंड और अंडकोष से बने उभार पर गई, उसके दिल की धड़कन एक बार से फिर बढ़ने लगी। वो विवेक को बिना चाय पूछे ही बाहर आ गई और रसोई में जाकर चाय बनाने लगी।वो चाय बनाने में मशरूफ थी कि विवेक रसोई में आया और उसने सुनीता को पीछे से पकड़ कर अपने से चिपका लिया। सुनीता ने छूटने की कोशिश की पर विवेक ने उसको कस के पकड़े रखा और अपने होंठ सुनीता की गर्दन पर रख दिए। वो सुनीता की गर्दन और कान की लटकन को चूमने लगा। विवेक का इतना करना था कि सुनीता भी बहकने लगी और विवेक से लिपट गई।गैस बंद कर विवेक सुनीता को एक बार फिर अपने बेडरूम में ले गया और कुछ ही देर बाद दोनों माँ

गाड़ी में देसी गर्लफ्रेंड का मुंह भरा हुआ

Related videos