तुम्हारे रूम में कुछ लेने आया था तुम्हारी ब्रा गिरी पड़ी थी तो मैं उसे उठा कर टांगने जा रहा था” मैंने उसके हाथों से अपनी ब्रा छुड़ाकर ले ली।वो शरमा कर चला गया। मैंने देखा तो मेरी ब्रा गीली गीली लग रही थी। मुझे पता हो गया माल गिरा कर गया है अपना। माल भी उसका बहुत गाढ़ा था। मैंने उसे सूंघकर चाट लिया। पहले नवीन मुझे बहुत घूर घूर कर देखता था लेकिन अब पता नहीं क्या हो गया।वो डर के मारे मेरी तरफ देख ही नहीं रहा था। मैं भी अब उसके माल का रसपान करना चाहती थी। कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा। अब वो भी मुझसे आँख मिलाने लगा। लेकिन कुछ कह नहीं पा रहा था। कुत्ते की पूंछ की तरह था। फिर से जैसा पहले जैसा ही हो गया। मेरी चूंचियो को पकड़कर दबा देता था।मैं भी उसका कोई विरोध नही करती थी। जब तक चाहता था मेरी बूब्स के ऊपर हाथ रख कर पकडे रहता था। घर वाले यही समझते थे बहुत प्यार है दोंनो में। ये उनको नहीं पता था कि मुझसे नहीं मेरी चूत से प्यार करना चाहता था। एक दिन मेरे घर कुछ मेहमान आये हुए थे।मम्मी के साथ ही उनमें से एक लोग लेटना चाहती थी। मम्मी के साथ ही मैं लेटती थी। लेकिन मैं मना भी नहीं कर पाई। मैंने















