मुझे शरारत सूझी और मैंने अपनी ज़बान को मुंह में बंद कर दिया. XXX Hindi वो भी पलंग पर चढ़ गई. तकिए को उसकी गांड के नीचे सही किया. मैंने उसकी गांड के दोनों भागों पर अपना हाथ फेरा. अब बिजली ने मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे झंडे की तरह हिलाने लगी. बिजली झुंझला कर बोली…” जल्दी करो बाबूजी, ये क्या खेल खेल रहे हो?”मैं उसकी बात अनसुनी करके अपना काम करता रहा. अब मेरा लंड किसी पिस्टन की तरह फटाफट आगे पीछे हो रहा था और उसकी चूत उसका खूब मज़ा ले रही थी. मैने दरवाज़े की तरफ़ देखते हुए कहा… तुम्हारे पिताजी को मालूम है कि तुम इस तरह मालिश करती हो.अरे उन्होंने ही तो भेजा है. मैं डर रहा था कि कहीं कोई आ न जाए. भीगी हुई उसकी चूत का स्पर्श मुझे किसी और ही दुनिया में ले गया. इतनी जल्दी टायं टायं फिस्स. ऑफ़िस के काम से मुझे यूपी के एक छोटे से कस्बे में जाना पड़ा. ग्यारह बज गए हैं बाबू साब…. ऐसा करने से उसकी चूत से और भी चिकना द्रव निकलने लगा. उसने फिर अपने नरम नरम हाथों से मेरे लंड को पकड़ा और मेरे गीले गीले लंड को मसलने लगी. ये समस्या भी अनुभवी बिजली ने हल कर डाला. वो बोली… पानी पिएंगे ?मैंने ना में सिर हिलाया. शालू की हलकी सी चीख















