करीब पांच मिनट बाद मैंने उनके चूच को थोड़ा छुआ फिर थोड़ा फिर थोड़ा और बाद में पूरा हथेली दोनों हाथ कि दोनों चूच पे रख दिया.गाडी सरपट भाग रही थी, मेरा सांस भी उसी रप्तार में चल रहा था, तभी मैंने देखा वो मेरे हाथ को पकड़ के अपने चूच पे रख के दबाब देने लगी, मैं भी उनके चूच को दबाने लगा, फिर वो उठी बैठ गयी कुछ भी नहीं बोली और अपना कुर्ता खोल दी वो अब ब्रा पे थी और फिर वो वैसे ही लेट गयी.ओह्ह्ह्ह माय गोड क्या चीज़ लग रही थी यार मैं तो पागल हो गया था मैंने चूची दबाई पर मन नहीं मान रहा था मैंने उनके पीठ के पीछे हाथ घुसाया और ब्रा का हुक खोल दिया. हिंदी XXX मेरा नाम अमिष है, दोस्तों कभी कभी ऐसा होता है आपके जीवन का एक यादगार पल आपके ख्वाबो में हमेशा हमेशा के लिए रिकॉर्ड हो जाता है, जब भी आपका मन निराश होता है या तो आप कभी अपने आप को अकेला महसूस करते है तब वही ख्वाब से अपने जीवन में एक बसंत लाते है, उसी ख्वाब को सोच कर आप खुश होते है. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.मैंने कहा हां ठीक है कोई बात नहीं मैं बस अपना टिकट बनाने ही वाला था तभी आप आ गयी, चलिए















