प्रतिमा अपने पति की उस ताबड़ तोड़ चुदाई से बहुत ज़बरदस्त आनंद महसूस कर रही थी. वो चोर नज़रों से प्रतिमा को घूर रहा था. हिंदी XXX जब रिशु बिलकुल पास आ गया तब उसने कहा “रिशु यार, क्या तू भी, कब से तेरा इंतज़ार कर रहे हैं, तू आया क्यों नहीं?“मेरी तबीअत ठीक नहीं थी, सर दर्द था, वैसे भी मेरा मूड नहीं है, तुम लोग खेलो”.“अरे नहीं यार, तेरे बिना बात नहीं बनेगी, चल ना यार”.“नहीं मैं नहीं जा सकता, मैंने तुझे बताया ना कि मुझे सर में बहुत तेज़ दर्द है” रिशु की आँखें अपने दोस्त की आँखों का पिछा कर रही थीं और उसका चेहरा लाल होता जा रहा था.“प्लीज यार चल ना, तूने प्रॉमिस किया था”.“मैने एक बार बोल दिया ना कि मैं नहीं जाऊँगा” रिशु एकदम भड़क कर बोला.उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि वैभव उसकी माँ के बदन को घूर रहा था. उसे सुन्दर दिखने के लिए किसी भी तरह का फैशन करने की या फिर मेकअप करने की जरूरत नहीं थी.रिशु को हैरानी हो रही थी कि उसका इस और पहले धयान क्यों नहीं गया. मगर अपनी माँ की प्रतिकिर्या को लेकर वो बहुत डर गया था. आखिरी बार प्रतिमा और उसका पति तब बाहर गये थे.















