मैंने अपनी तरफ से सारी कोशिश कर ली, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ, लगता है उन्हें कोई परेशानी है.मैंने कई बार उनसे डॉक्टर से मिलने के लिए कहा, लेकिन वो मानते नहीं, लगता है कि मेरा जीवन तो सबके ताने सुनते सुनते ही खत्म हो जाएगा। तब मेरी माँ ने कहा कि बेटी धीरज से काम ले, भगवान ने चाहा तो जल्द ही सब ठीक हो जाएगा, तू बस अपनी कोशिश करती रह।अब इस दौरान जब मेरी माँ उन्हें दिलासा दे रही थी। फिर भाभी ने कुछ झुकते हुए अपना सिर मेरी माँ के कंधे पर रखा हुआ था। अब इस वज़ह से भाभी की गांड काफ़ी ऊपर उठ गयी थी। मुझे पता नहीं कब, लेकिन अचानक मेरा हाथ उनकी गांड के नीचे आ गया और जब वो नीचे बैठी तो मेरा हाथ उनकी गांड के नीचे दब गया था।अब मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया था, लेकिन मैंने अपना हाथ हिलाने की कोशिश नहीं की। फिर थोड़ी देर तक में ऐसे ही अपने हाथ पर उनकी गांड का भार सहता रहा। फिर मैंने थोड़ी हिम्मत करके अपने हाथ की उंगलियों को टेड़ा करके अपनी उंगली उनकी गांड की गहराई में घुसा दी।अब मुझे बहुत डर लग रहा था कि कहीं भाभी कुछ बोल पड़ी तो माँ मेरा बुरा हाल कर देंगी, लेकिन भाभी चुपचाप माँ से बात करती रही। अब















