देसी गाँव की गरम चुदाई

मैं उमेश से तेल की वजह से चिपक गई थी. उमेश मेरे दोनों बूब्स को साइड से दबाता और लंड को बीच में रगड़ता. XXX Hindi कोई मेरे बूब्स को दबा रहा था तो कोई मेरी पुस्सी को. क्या आराम मिल रहा था मसाज का. उमेश मेरे दोनों बूब्स को साइड से दबाता और लंड को बीच में रगड़ता. धीरे धीरे वो मेरी गांड को अपने लंड से दबाता हुआ नजदीक आया. मैं उमेश की ओर लेती हुई थी. टीवी देखते देखते भी कभी मैं उनके लंड को दबाती तो कभी वो मेरी पुस्सी पे हाथ घूमते या बूब्स पे. इस दौरान उमेश मेरी छाती पर चढ़ गया और अपना लंड मेरे दो सॉफ्ट रुई जैसे गोरे गोरे बूब्स के बीच बुरी तरह से घिसने लगा. उमेश ने मुझे कमर से पकड़ा और घुटनो पे बिठा दिया. टॉवल के सिवा मैंने कुछ नहीं पहना था. दोनों के सर मैंने अपने हाथो में दबाए थे इसलिए उनका मुँह मेरे बूब्स के पास था. रात का खाना ख़तम करके हम तीनो वापस बेड पे चले गए. गांड पे तो ऐसे तेल लगा रहा था कि मत पूछो जैसे उसका हाथ वहाँ से छूटने का नाम ही नहीं ले रहा था. टॉवल के सिवा मैंने कुछ नहीं पहना था. रात का खाना ख़तम करके हम तीनो वापस बेड पे चले गए.

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