देसी चूत की जोरदार चुदाई

साड़ी नयी आ जाएगी.”मैं: “नहीं, बहुत महँगी हैं, पहली बार पहनी हैं.”विनय: “मुझे वैसे भी तुम्हे पानी में भिगोना हैं, साड़ी को नहीं. XXX Hindi मैं ज्यादा नहीं हिली, वरना कमर वाले हाथ में पकड़ी खुली डिबिया से रंग मेरी साड़ी पर गिर सकता था. वैसे भी बासुकी मेरे साथ था उस वक्त.”विनय: “अब होली के दिन बुरा मत मानो, गीला तो होना पड़ेगा.”काश मैंने बिना दरवाजा खोले उसको बाहर से ही भगा दिया होता तो मेरी ये हालत नहीं होती. वैसे सीमा की भी गलती थी. मुझे टब में खडी कर उसने नल चालू कर दिया और टब में पानी भरने लगा. पीप-होल से झाँका तो देखा हमारे पुराने घर का पडोसी विनय जो बासुकी का ख़ास दोस्त भी हैं, वो खड़ा हैं.हर साल वो और बासुकी साथ में होली की मस्ती करते हैं. थोड़ी देर के लिए ही पहननी थी तो मैंने ब्रा भी नहीं पहना.अभी पूरा तैयार भी नहीं हुई थी कि डोर बेल बज उठी. मेरी साड़ी ड्राई क्लीन की हैं, उसको पानी में नहीं भिगो सकते ख़राब जो जाएगी. पिछले साल तो तुम कमरे में बंद हो गयी थी बचने के लिए.”ये सुनते ही मैं चीखते हुए रसोई की तरफ भागने को हुई और उसने मुझे फिर पीछे से पकड़ लिया.मैं: “नहीं विनय, प्लीज. पहला हाथ कमर से हटते ही उसने अपने दूसरे हाथ से मेरी कमर को पकड़

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