देसी बीवी की गर्म गुदगुदी

आप भी छोटे थे… पर अब तो आप बड़े हो गये हो…”“आप भी तो इतनी लम्बी और सुन्दर सी… मेरा मतलब है… बड़ी हो गई हैं।”मैं उसकी बातों से शरमा रही थी। तभी उसका हाथ धीरे से बढ़ा और मेरे हाथ से टकरा गया। मुझ पर तो जैसे हजारों बिजलियाँ टूट पड़ी। मैं तो जैसे पत्थर की बुत सी हो गई थी। मैं पूरी कांप उठी। उसने हिम्मत करते हुये मेरे हाथ पर अपना हाथ जमा दिया।“अनुग्रह जी, आप यह क्या कर रहे हैं? XXX Hindi चलो… फिर कपड़े भी बदल लेना…पर वो तो आँखें फ़ाड़े मुझे घूरने में लगा था। मुझे भी अपनी हालत का एकाएक ध्यान हो आया और मैं संकुचा गई और शरमा कर जल्दी से दूसरे कमरे में चली गई। मुझे अपनी हालत पर बहुत शर्म आई और मेरे दिल में एक गुदगुदी सी उठ गई।पर वास्तव में यह एक बड़ी लापरवाही थी जिसका असर ये था कि अनुग्रह का मुझे देखने का नजरिया बदल गया था। मैंने जल्दी से अपना काला पाजामा और एक ढीला ढाला सा टॉप पहन लिया और गरम-गरम चाय बना लाई। वो नहा धो कर कपड़े बदल रहा था। मैंने किसी जवान मर्द को शायद पहली बार वास्तव में चड्डी में देखा था।उसके चड्डी के भीतर लण्ड का उभार… उसकी गीली चड्डी में से उसके सख्त उभरे हुये और कसे हुये चूतड़ और उसकी गहराई…

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