अपनी एक सहेली के बाप को मैं बहुत पसंद करती थी। मैं उसके साथ चुदाई के लिए भी तैयार थी। एक बार उसे पूरा मौक़ा मिला। हम क़रीब दो घंटो अकेले साथ रहे लेकिन उसकी हिम्मत ही नहीं हुई कि मुझे नंगा भी कर सके।मेरे पति की क़िस्मत, मेरी चूत उनके लंड के लिए कुंवारी ही रही। और मेरे पति संतोष तिवारी ने सुहाग रात को चोदते चोदते रुला दिया। नहीं नहीं करते रहने पर भी हरामी ने पहली रात ही तीन बार चोदा। सच कहूँ तो बहुत मस्त कर दिया तिवारी बाबू ने। मैं अपने सभी पुराने आंशिक को भूल गई।शादी के ६ साल के अंदर ही मैंने तिवारी जी के दो बेटों को जन्म दिया। दूसरे बेटे के जन्म के एक साल के अंदर ही मेरे पति बड़ा बाबू बन गये। लेकिन साथ ही तबादला भी हो गया। एक छोटे शहर से हम बनारस आ गये। मैं क्या, मेरे पति के लिए भी बनारस बहुत बड़ा शहर था। नये लोग नई जगह।वहाँ एक आदमी ने हमारी बहुत मदद की। यहाँ बता दूँ कि मेरे पति पीडब्ल्यूडी में बड़े बाबू थे। मदद करने बाले आदमी का नाम आनंद पासवान था। मेरे पति उनसे पहले कई बार मिल चुके थे। इसलिए उन्होंने आनंद की मदद ली। तबादला होने के बाद तिवारी जी पहली बार बनारस आये तो आनंद ने उन्हें अपने ही















