वो अपना हाथ मेरे हाथ में डाल कर मुझे खींचते हुए रेस्टोरेंट के अन्दर ले गई। हम दोनों अपनी टेबल पर बैठ गए थे, उसने खाना आर्डर किया और फिर हम बातों में लग गए। मैं अभी भी उसे ही देख रहा था। बातों ही बातों में हम लोगों ने खाना कब खत्म किया.. उसके मुँह से यही निकले कि वाह्ह क्या लड़की है। मैंने किसी तरह खयालों से अपने आपको निकाला, उससे बात करनी शुरू की। वो मेरे हर सवाल का जवाब अपनी हँसी के साथ दे रही थी। मैं तो उसकी हँसमुख जवानी पर मर ही गया था।फिर उसने अगले दिन एक होटल में मुझे खाने पर बुलाया और मैंने बहाने बनाते हुए ‘हाँ’ कर दी। उसे क्या पता कि मेरे अन्दर क्या लड्डू फूट रहे हैं। अगली दोपहर में जाना तय हुआ। अगली सुबह में बिल्कुल तैयार होकर उसकी बताई जगह पर पहुँचा। वो पहले से ही वहाँ तैयार खड़ी थी। उसे देख कर मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं।उसने रेड टॉप और ब्लैक स्कर्ट पहन रखा था। उसके मम्मे बहुत छोटे थे.. हिंदी XXX कम ऑन बेबी.. मैं मीनाक्षी जबलपुर से हूँ।’मैंने कहा- मैं जानता हूँ।क्या लग रही थी वो.. मेरा नाम सुधांशु है, कुछ दिन पहले एक ट्रेनिंग के सिलसिले में इंदौर गया हुआ था। उसकी कंपनी में उसके साथ काम करने वाली एक लोकल लड़की भी ट्रेनिंग















