कोई परेशानी तो नहीं है?तो मैंने कहा- ऐसी कोई बात नहीं है अंकल, नई भाभी आई हैं तो कहीं मेरे बार-बार ऊपर आने से उन्हें अनकंफर्टेबल फील हो।यह बात सुनकर अंकल ने मुझ में डांट लगाई और कहा- तुम भी इस घर के एक सदस्य हो!और उन्होंने नई भाभी अंजू को आवाज़ लगाई और मेरा परिचय करवाया कि यह भी इस घर का सदस्य है। इसके बाद मेरा ऊपर आना एक मजबूरी बन गया। अब मैं कॉलेज से आने के बाद और शाम को ऊपर जाने लगा। धीरे धीरे मेरी भाभी से बात होने लगी।उनका स्वभाव भी बहुत अच्छा था और उनके साथ जल्द ही घुल मिल गया। उधर दो हफ्ते बाद संजना के एग्जाम खत्म हो गए और वह भी वापस आगरा आ गई। कुछ दिन बाद एक दिन मैं अपने रूम में बैठकर पढ़ाई कर रहा था तभी संजना अपनी बुक्स लेकर नीचे मेरे रूम में आ गई और बोली- मैं भी यहीं बैठ कर स्टडी करूंगी क्योंकि ऊपर ज्यादा डिस्टर्ब होता है।मैंने ऐसे ही उससे पूछ लिया- ऊपर डिस्टर्ब क्यों होता है?तो उसने मुझे अजीब से नजरों से देखा।मैं कुछ समझ नहीं पाया तो मैंने उससे दोबारा पूछा- ऐसे क्यों रिएक्ट कर रही हो?तो उसने कहा- नई भाभी को भी एकान्त चाहिए।मैंने पूछा- उन्हें एकांत की क्या जरूरत है?तो उसने कहा- भैया की 3 दिन की छुट्टी बची है















